“पाज़ेब” हिंदी कहानी / Pajeb Hindi Story
Paazeb Hindi Kahani / Hindi Story Pajeb / Pajeb Story In Hindi / हिंदी कहानी पाज़ेब। पाज़ेब कहानी: पाज़ेब गाँव की उस संकरी पगडंडी पर जब भी कोई चलता, तो दूर तक धूल उड़ती और फिर धीरे-धीरे बैठ जाती—ठीक वैसे ही जैसे किसी के जीवन में उठी हलचल कुछ समय बाद शांत हो जाती है। उस गाँव का नाम था चन्द्रपुरा। वहीं रहती थी एक साधारण सी लड़की—गौरी। गौरी का जीवन बहुत साधारण था, लेकिन उसके मन में सपनों की कोई कमी नहीं थी। उसकी सबसे प्रिय वस्तु थी—उसकी चाँदी की पाज़ेब। वह पाज़ेब उसकी माँ ने उसे उसके बचपन में दी थी। माँ ने कहा था, “जब भी यह पाज़ेब बजेगी, मुझे समझना कि तू खुश है।” गौरी जब भी चलती, उसकी पाज़ेब की छन-छन पूरे आँगन में गूँज जाती। वह आवाज़ सिर्फ धातु की नहीं थी, उसमें उसकी माँ का स्नेह, उसका बचपन और उसके सपनों की धड़कन शामिल थी। गौरी की माँ का देहांत तब हो गया था जब वह बहुत छोटी थी। उसके बाद उसके पिता रामदीन ने ही उसे पाला। वे किसान थे, मेहनती और ईमानदार। मगर गरीबी हमेशा उनके साथ रहती। गौरी अक्सर अपनी पाज़ेब को देखते हुए सोचती—“माँ ने इसे कितने प्यार से पहनाया होगा।” वह उसे कभी उतारती नही...