“कच्ची गोली खेलना” मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Kachhi Goli Khelna Meaning In Hindi

  Kachhi Goliya Khelna Muhavare Ka Arth Aur Vakya Prayog / कच्ची गोलियां खेलना मुहावरे का क्या अर्थ होता है? मुहावरा- “कच्ची गोली खेलना”। (Muhavara- Kachhi Goli Khelna) अर्थ- अनाड़ी होना / अनुभवहिन होना / नादान होना । (Arth/Meaning In Hindi- Anadi Hona / Anubhavhin Hona / Nadan Hona) "कच्ची गोली खेलना" मुहावरे का अर्थ/व्याख्या इस प्रकार है- अर्थ: "कच्ची गोली खेलना" मुहावरे का अर्थ है अनुभवहीन या अपरिपक्व होना। यह मुहावरा उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जो किसी कार्य, चालाकी, राजनीति या व्यवहार में निपुण नहीं होते, यानी जिनके व्यवहार में परिपक्वता और चतुराई का अभाव होता है। कभी-कभी इस मुहावरे का प्रयोग उस सन्दर्भ में भी होता है जब कोई व्यक्ति सामने वाले को सरल या भोला समझता है और उसकी चालाकियों को न पहचान पाता है। व्याख्या: भारतीय संस्कृति में लोक भाषा और मुहावरों का अत्यधिक महत्व रहा है। "कच्ची गोली खेलना" भी ऐसा ही एक प्रसिद्ध मुहावरा है, जो हमारे रोजमर्रा के संवादों में चतुराई, अनुभव और परिपक्वता के स्तर को दर्शाने के लिए प्रयुक्त होता है। जब हम कहते ...

बाल की खाल निकालना मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Baal Ki Khaal Nikalna Meaning In Hindi

 

Bal Ki Khal Nikalna Muhavare Ka Arth Aur Vakya Prayog / बाल की खाल निकालना मुहावरे का अर्थ क्या होता है ?

 

बाल की खाल निकालना मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Baal Ki Khaal Nikalna Meaning In Hindi
Bal Ki Khal Nikalna





मुहावरा- “बाल की खाल निकालना” । 


( Muhavara- Baal Ki Khaal Nikalna )



अर्थ- अनावश्यक विश्लेषण करना / छोटी बात पर तर्क देना / व्यर्थ का दोष निकालना / बारिकी से जाँच करना ।


( Arth/Meaning in Hindi- Anavashyak Vishleshan Karna / Choti Bat Par Tark Dena / Vyarth Ka Dosh Nikalna / Bariki Se Janch Karna )




“बाल की खाल निकालना” मुहावरे का अर्थ व्याख्या इस प्रकार है- 


बाल की खाल निकालना” यह हिंदी भाषा में उपयोग होने वाला एक प्रचलित मुहावरा है । इस मुहावरे का अर्थ किसी बात का अनावश्यक विश्लेषण करना, छोटी से छोटी बात पर भी तर्क देना या किसी चीज की बारीकी से जाँच करना होता है ।


बाल की खाल निकालना” मुहावरे का अर्थ है किसी विषय को बहुत गहराई से अध्ययन करना या उसकी बातचीत करना, ताकि सच्चाई और सबकुछ स्पष्ट रूप से समझा जा सके । यह एक घरी जांच या विश्लेषण की प्रक्रिया को सूचित करने के लिए प्रयुक्त होता है ।


बाल की खाल निकालना” मुहावरा एक भाषा का लोकोक्ति है, जिसका अर्थ किसी को बर्बाद करना या किसी की सच्चाई या असलिता को उजागर करना होता है । इसमें किसी की दिलचस्पी बढ़ाने या किसी असली स्थिति को सामने लाने का भी मतलब हो सकता है । 


यह मुहावरा उस स्थिति को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होता है, जिसमें किसी व्यक्ति या चीज की असली पहचान को सामने लाने का इरादा होता हो, और उसे पुरी तरह से समझा जा सकता है । 



इस मुहावरे का अर्थ एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं -


नेता जी ने अपने वकीलों को यह सिखाया कि वे स्थिति को सही दिशा में समझें और बाल की खाल निकालें ।


नेता जी पहली बार चुनाव जीते थे । नेता जी ने कुछ वकीलों को अपनें टीम में शामिल किया था । नेता जी ने वकीलों को बताया की वे छोटी बात पर भी अपना तर्क दे । नेता जी ने वकीलों को ये भी बताया कि वे हर केश का बारीकी से जांच करें । अर्थात कि छोटी बात पर तर्क देना या किसी चीज की बारीकी से जांच करना ही “बाल की खाल निकालना” मुहावरे के समान है ।



“बाल की खाल निकालना” मुहावरे का वाक्य प्रयोग / Baal Ki Khaal Nikalna Muhavara Ka Vakya Prayog.


बाल की खाल निकालना” इस मुहावरे का अर्थ नीचे दिए गए कुछ वाक्य प्रयोगों के माध्यम से समझा जा सकता है, जो कि इस प्रकार से हैं -



वाक्य प्रयोग- 1.


राज अपने दादा जी के बताये हुए बातों पर बाल की खाल निकलता रहता है ।

राज की जब छुट्टियां होती तो वो अपने दादा जी के साथ समय व्यतीत करता है । राज के दादा जी जब भी उसे कोई प्रेणनादायक बात बताते तो राज उस बात पर अनावश्यक विश्लेषण करने लगता है । राज अपने दादा जी को हर बात पर तर्क करने लगता । राज के दादा जी कभी भी राज के तर्क करने से नाराज़ नही होते वो राज के हर तर्क का जबाब गहराई से देते है । अर्थात राज का अपने दादा जी के द्वारा बताये हुए बातों पर अनावश्यक विश्लेषण करने या उनके बातों पर तर्क करने को ही “बाल की खाल निकालना” कहते हैं ।



वाक्य प्रयोग- 2.


पुलिस वालों ने अपराधी को पकड़ने के लिए बाल की खाल निकाला तब जाके अपराधी पकड़ा गया ।

हत्या करके एक अपराधी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया । पुलिस हत्या के आरोपी को पकड़ने के लिए घटना स्थल पर पहुंच कर बारिकी से जांच करना शुरु कर दिया । पुलिस जब घटना स्थल पर बारीकियों से जांच कर रही थी तो उसे अपराधी के खिलाफ़ कुछ अहम सबुत मिले । इन सबूतों के वजह से ही पुलिस उस हत्या के आरोपी को पकड़ने में कामयाब हो पायी । मतलब कि पुलिस द्वारा हत्या के आरोपी को पकड़ने के लिए बारिकी से जांच करना ही  “बाल की खाल निकालना” कहलाता है ।



वाक्य प्रयोग- 3.


सोनू अपने गुरु से प्रश्न पुछ कर बाल की खाल निकलता रहता है ।

सोनू को एक गुरु जी हर रोज उसके घर आकर उसे टयूशन पढ़ाते हैं । टयूशन पढ़ते हुए सोनू अपने गुरु जी से जब कोई प्रश्न पूछता तो गुरु जी उस प्रश्न को बहुत ही सहजता से सोनू को समझा देते है । पर सोनू उन जबाबों से संतुष्ट नही होता है, और वो अपने गुरु के जबाबों पर तर्क करने लगता है । अपने गुरु जी के द्वारा बताये गये सभी प्रश्नों के जबाब पर सोनू तर्क करता रहता है । सोनू बताए गए जबाबों पर भी अनावश्यक विश्लेषण करता और उनपर अन्य प्रश्न पूछ-पूछ कर अपने गुरु से तर्क करता रहता है । अर्थात सोनू अपने गुरु जी से प्रश्न पूछ कर बाल की खाल निकालता रहता है ।



वाक्य प्रयोग- 4.


शर्मा जी अपने मजदूरों के कामों में बाल की खाल निकालते रहते हैं ।

शर्मा जी का एक छोटा सा ईंट की फैक्ट्री है । उस फैक्ट्री में कुछ मजदूर काम करते हैं । शर्मा जी के ईंट की फैक्ट्री को उनका एक रिश्तेदार चलवाता है । शर्मा जी के रिश्तेदार का स्वभाव बहुत ही अच्छा है । पर शर्मा जी का स्वभाव थोड़ा टेढ़ा है । शर्मा जी जब भी अपने फैक्ट्री आते तो वो फैक्ट्री में हो रहे कामों का बारिकी से जांच करते है । और मजदूरों के द्वारा किए गए कामों में कोई ना कोई कमियाँ निकाल कर उन मजदूरों पर व्यर्थ का दोष निकालते और उनसे तर्क करने लगते हैं । शर्मा जी का इस प्रकार अपने मजदूरों के द्वारा किये गये कामों पर व्यर्थ का दोष निकलना और उनसे छोटी बातों पर भी तर्क करना ही “बाल की खाल निकालना” कहलाता है ।



वाक्य प्रयोग- 5.


कुछ न्यूज़ एंकर अपने प्रोग्रामों में कुछ विषयों पर बाल की खाल निकालने में माहिर हैं । 

आज के कुछ न्यूज़ एंकर अपने प्रोग्राम में अनावश्यक विश्लेषण करते रहते हैं । वो बेमतलब के विपक्ष के नेताओं पर तर्क करते रहते हैं । एंकर को जनता से जुड़े मुद्दे पर विश्लेषण करना चाहिए । जैसे महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी और भी बाकि मुद्दों पर न्यूज़ एकरों को विश्लेषण करना चाहिए । मौजूदा समय में सबसे बड़ा विश्लेषण का मुद्दा है महंगाई और बेरोजगारी । पर इन मुद्दों को छोड़ कर ये लोग सरकार के विपक्ष में बैठे नेताओं पर अनावश्यक विश्लेषण करते रहते है और उनके द्वारा कही हुई छोटी से छोटी बात पर भी अपने प्रोग्रामों मे तर्क करते रहते हैं । अर्थात असली मुद्दों से हटकर बेकार के मुद्दों पर जिससे गरीब जनता को कोई मतलब नही है उन विषयो पर कुछ न्यूज़ एंकरों का अनावश्यक विश्लेषण करना या बिपक्ष में बैठे नेताओं के द्वारा कही हुई छोटी बातों पर भी तर्क करने को ही “बाल की खाल निकालना” कहते हैं ।



दोस्तों, हमें आशा करते हैं कि आपको इस मुहावरे का अर्थ समझ में आ गया होगा । अपने सुझाव देने के लिए हमें कमैंट्स जरूर करें ।


आपका दिन शुभ हो ! 😊



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