“अदले का बदला” मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Adale Ka Badla Meaning In Hindi
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Adale Ka Badla Muhavare Ka Arth Aur Vakya Prayog / अदले का बदला मुहावरे का क्या अर्थ होता है?
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Adale Ka Badla |
मुहावरा- “अदले का बदला”।
( Muhavara- Adale Ka Badla )
अर्थ- जैसे को तैसा / बुराई का जवाब बुराई से देना / अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा करना ।
( Arth/Meaning In Hindi- Jaise Ko Taisa / Burai Ka Jawab Burai Se Dena / Apani Pratishtha Ki Raksha Karna )
“अदले का बदला” मुहावरे का अर्थ/व्याख्या इस प्रकार है-
“अदले का बदला” एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है। इस मुहावरे का अर्थ है- जैसे को तैसा, अर्थात् किसी के द्वारा किए गए बुरे काम का उसी प्रकार उत्तर देना। जब कोई व्यक्ति हमें नुकसान पहुँचाता है या अन्याय करता है, तो उसके साथ वैसा ही व्यवहार करना या उसे उसी तरह जवाब देना "अदले का बदला" कहलाता है। इसे प्रतिशोध या बराबरी का हिसाब चुकता करने का भाव भी कहा जाता है।
अर्थ की गहराई:
यह मुहावरा न्याय और प्रतिशोध के बीच की बारीक रेखा को दर्शाता है। इसका उपयोग तब किया जाता है, जब कोई व्यक्ति अपने साथ हुए अन्याय या अपमान का जवाब उसी अंदाज में देना चाहता है। इसका सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों रूपों में प्रयोग हो सकता है।
सकारात्मक रूप में यह न्याय की भावना को दर्शाता है, जहाँ व्यक्ति अपने ऊपर हुए अन्याय का उचित जवाब देकर अपनी गरिमा को बनाए रखता है।
नकारात्मक रूप में यह प्रतिशोध की भावना को जन्म देता है, जहाँ व्यक्ति क्रोधवश बदले की भावना से प्रेरित होकर वैसा ही व्यवहार करता है, जो उसके साथ किया गया था।
उदाहरण:
1. रामू ने मोहन को धोखा दिया, तो मोहन ने भी "अदले का बदला" लेकर उसे वैसा ही धोखा दे दिया।
2. सीमा ने अपनी सहेली से बुरा व्यवहार किया, लेकिन उसकी सहेली ने "अदले का बदला" न लेकर उदारता दिखाई।
व्याख्या:
इस मुहावरे के पीछे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पहलू भी छिपे होते हैं। जब कोई इंसान खुद के साथ हुए अन्याय का जवाब देने के लिए प्रेरित होता है, तो यह उसकी आत्मरक्षा और आत्मसम्मान से जुड़ा मामला बन जाता है। हालांकि, यह हमेशा सही परिणाम नहीं लाता। कभी-कभी बदले की आग रिश्तों को और बिगाड़ सकती है, जबकि माफी और संयम रिश्तों को संवार सकते हैं।
भगवद गीता और रामायण जैसी धार्मिक ग्रंथों में भी इस भावना का वर्णन मिलता है। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्धभूमि में धर्म के लिए लड़ने को कहा, न कि व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए। इसी प्रकार, भगवान राम ने रावण से युद्ध किया, लेकिन वह बदले की भावना से नहीं, बल्कि धर्म और न्याय की रक्षा के लिए था।
"अदले का बदला" मुहावरे का वाक्य प्रयोग / Adale Ka Badla Muhavare Ka Vakya Prayog.
1. राजू ने परीक्षा में अपने दोस्त की मदद नहीं की, तो दोस्त ने भी "अदले का बदला" लेकर उसे प्रोजेक्ट में मदद नहीं की।
2. जब श्याम ने रवि को अपमानित किया, तो रवि ने भी "अदले का बदला" लेकर सबके सामने श्याम की पोल खोल दी।
3. सुरेश ने अपनी बहन से झूठ बोला, तो उसकी बहन ने भी "अदले का बदला" लेकर उससे सच्चाई छिपा ली।
4. राम ने जब श्याम के काम में अड़चन डाली, तो श्याम ने भी "अदले का बदला" देकर उसे सबक सिखाया।
5. व्यापार में धोखा मिलने पर मोहन ने "अदले का बदला" लेने की जगह ईमानदारी से आगे बढ़ना सही समझा।
6. गीता ने राधा का मजाक उड़ाया, लेकिन राधा ने "अदले का बदला" लेने के बजाय समझदारी दिखाई।
7. अनिल ने अपनी टीम के साथ धोखा किया, तो टीम ने भी "अदले का बदला" लेते हुए उसे अकेला छोड़ दिया।
8. विजय ने अपने पड़ोसी को तंग किया, तो पड़ोसी ने भी "अदले का बदला" लेकर उसे परेशान करना शुरू कर दिया।
9. नेता जी ने जनता से झूठे वादे किए, तो जनता ने "अदले का बदला" चुनाव में उन्हें हराकर लिया।
10. जब दोस्त ने मेरे साथ विश्वासघात किया, तो मैंने "अदले का बदला" लेकर दोस्ती तोड़ दी।
11. रीना ने सबके सामने संजय का मजाक उड़ाया, तो संजय ने "अदले का बदला" लेकर उसकी गलतियों को गिना दिया।
12. जब राकेश ने मुझसे मदद मांगी, तो मुझे उसके पुराने व्यवहार का याद आया, लेकिन मैंने "अदले का बदला" नहीं लिया।
13. सोहन ने जानबूझकर मीनू की किताब छिपाई, तो मीनू ने भी "अदले का बदला" लेकर उसका बैग छिपा दिया।
14. जब रोहन ने खेल में जानबूझकर मुझे हराया, तो मैंने अगली बार "अदले का बदला" लेकर उसे मात दी।
15. सच्चाई यही है कि "अदले का बदला" लेने से मन को शांति नहीं मिलती, बल्कि माफ करने से खुशी मिलती है।
निष्कर्ष:
"अदले का बदला" मुहावरा जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाता है। यह हमें सिखाता है कि बुराई का प्रतिकार जरूरी है, लेकिन वह प्रतिशोध की भावना से प्रेरित न हो, बल्कि न्याय और सत्य की भावना से हो। यदि हर व्यक्ति "अदले का बदला" की जगह "क्षमा और करुणा" की भावना अपनाए, तो समाज में शांति और सद्भाव बना रह सकता है।
कहानी: "अदले का बदला"
गाँव के दो दोस्त, राजू और मोहन, बचपन से साथ खेलते-कूदते बड़े हुए थे। दोनों की दोस्ती की मिसाल पूरे गाँव में दी जाती थी। लेकिन समय के साथ, उनके रास्ते अलग हो गए। राजू मेहनती था और पढ़ाई में आगे बढ़कर एक बड़ा व्यापारी बन गया, जबकि मोहन गलत संगत में पड़कर आलसी और चिड़चिड़ा हो गया।
एक दिन, मोहन ने जलन के कारण राजू के व्यापार को बदनाम करने की योजना बनाई। उसने गाँव में अफवाह फैला दी कि राजू अपने ग्राहकों को धोखा देता है। धीरे-धीरे लोग राजू से दूर होने लगे, और उसका व्यापार मंदा पड़ने लगा। जब राजू को इस साजिश का पता चला, तो उसे बहुत दुख हुआ।
राजू के परिवार और दोस्तों ने उसे समझाया कि उसे "अदले का बदला" लेना चाहिए और मोहन को सबक सिखाना चाहिए। लेकिन राजू ने कहा, "बदले से न तो मेरी सच्चाई साबित होगी, न ही मेरी आत्मा को शांति मिलेगी।"
राजू ने अपनी ईमानदारी पर विश्वास रखा और अपने व्यापार को और बेहतर बनाने में जुट गया। उसने ग्राहकों को और अच्छी सेवा दी, कीमतें कम कीं, और गाँव वालों की मदद भी करने लगा। धीरे-धीरे लोग समझ गए कि राजू के खिलाफ फैलाई गई बातें झूठी थीं।
दूसरी ओर, मोहन का झूठ जब सबके सामने आया, तो गाँव वालों ने उससे नाता तोड़ लिया। वह अकेला और पछतावे से घिर गया।
एक दिन, मोहन शर्मिंदा होकर राजू के पास आया और रोते हुए माफी माँगी। राजू ने मुस्कुराकर कहा, "मैंने बदले के लिए नहीं, भरोसे के लिए काम किया था। अगर मैं 'अदले का बदला' लेता, तो हम दोनों हार जाते।"
मोहन ने अपनी गलती मानी और राजू से सच्चे दिल से दोस्ती की दुबारा शुरुआत करने की विनती की। राजू ने उसे माफ कर दिया। दोनों की दोस्ती फिर से गहरी हो गई, और इस बार पहले से ज्यादा मजबूत थी।
सीख:
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि "अदले का बदला" लेना हमेशा जरूरी नहीं होता। कभी-कभी माफ करना और अपनी अच्छाई बनाए रखना ही सबसे बड़ा बदला होता है, क्योंकि सच्चाई देर से सही, लेकिन जरूर जीतती है।
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