“किताबी कीड़ा होना” मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Kitabi Kida Hona Meaning In Hindi
Kitabi Kida Hona Muhavare Ka Arth Aur Vakya Prayog / किताबी कीड़ा होना मुहावरे का क्या अर्थ होता है?
मुहावरा- “किताबी कीड़ा होना”।
(Muhavara- Kitabi Kida Hona)
अर्थ- किताबों में डूबा रहने वाला / किसी क्षेत्र में अत्यधिक ज्ञान करना ।
(Arth/Meaning in Hindi- Kitabo Me Duba Rahne Wala / Kisi Kshetra Me Atyadhik Gyan Rakhna)
“किताबी कीड़ा होना” मुहावरे का अर्थ/व्याख्या इस प्रकार है-
अर्थ:
'किताबी कीड़ा होना' एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है, जिसका अर्थ होता है वह व्यक्ति जो हर समय किताबों में ही डूबा रहता है और बाहरी दुनिया या व्यावहारिक जीवन से बहुत कम सरोकार रखता है। इस मुहावरे का प्रयोग उन लोगों के लिए किया जाता है, जो अत्यधिक अध्ययनशील होते हैं और जिनका ज्यादातर समय किताबों को पढ़ने या अध्ययन करने में बीतता है।
व्याख्या:
इस मुहावरे का शाब्दिक अर्थ 'किताबों में घुसे रहने वाला कीड़ा' होता है, जो यह दर्शाता है कि व्यक्ति हमेशा पढ़ाई या पुस्तकों में इतना लीन रहता है कि उसे अपने आस-पास की दुनिया की खबर ही नहीं रहती। आमतौर पर यह मुहावरा उन विद्यार्थियों के लिए प्रयुक्त किया जाता है, जो पढ़ाई में अत्यधिक रुचि रखते हैं और अन्य गतिविधियों में भाग नहीं लेते।
हालांकि, इस मुहावरे का प्रयोग सकारात्मक और नकारात्मक दोनों संदर्भों में किया जा सकता है। सकारात्मक रूप में, इसका अर्थ होता है कि व्यक्ति बहुत मेहनती और ज्ञानवान है, जो हमेशा पढ़ाई में लगा रहता है। वहीं, नकारात्मक रूप में, इसका तात्पर्य यह हो सकता है कि व्यक्ति सिर्फ किताबों तक सीमित रहकर व्यावहारिक ज्ञान से दूर हो गया है और सामाजिक व व्यवहारिक जीवन में उसका अधिक योगदान नहीं है।
उदाहरण:
1. सकारात्मक संदर्भ:
*"रवि दिन-रात पढ़ाई करता रहता है, वह सचमुच एक किताबी कीड़ा है।"
*"अगर तुम भी परीक्षा में अच्छे अंक लाना चाहते हो, तो तुम्हें कुछ दिन के लिए किताबी कीड़ा बनना पड़ेगा।"
2. नकारात्मक संदर्भ:
*"केवल किताबें पढ़ने से ही सफलता नहीं मिलती, व्यावहारिक ज्ञान भी जरूरी है, इसलिए किताबी कीड़ा मत बनो।"
*"रमेश को खेल-कूद में कोई दिलचस्पी नहीं है, वह तो सिर्फ एक किताबी कीड़ा बनकर रह गया है।"
साहित्यिक एवं सामाजिक संदर्भ:
इस मुहावरे का प्रयोग हिंदी साहित्य में भी अनेक बार हुआ है। यह विशेष रूप से उन पात्रों के लिए प्रयुक्त होता है, जो विद्वान होते हैं लेकिन सामाजिक या व्यवहारिक दृष्टि से कमजोर होते हैं।
वर्तमान समय में भी यह मुहावरा अत्यधिक प्रासंगिक है। आजकल की प्रतियोगी परीक्षाओं, बोर्ड परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के दबाव के कारण कई छात्र हर समय किताबों में डूबे रहते हैं और अन्य सामाजिक गतिविधियों में भाग नहीं लेते। इससे वे केवल सैद्धांतिक ज्ञान अर्जित करते हैं लेकिन व्यवहारिक अनुभवों से वंचित रह जाते हैं। इसीलिए, समाज में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है ताकि व्यक्ति न केवल ज्ञान अर्जित करे बल्कि उसे सही तरीके से व्यवहारिक जीवन में भी लागू कर सके।
व्यावहारिक जीवन में महत्व:
*शिक्षा और ज्ञान: यह मुहावरा उन विद्यार्थियों को प्रेरित करता है, जो ज्ञान प्राप्त करने में रुचि रखते हैं।
*संतुलन की आवश्यकता: केवल किताबों तक सीमित रहना व्यावहारिक जीवन के लिए सही नहीं होता। इसलिए पढ़ाई के साथ-साथ अन्य कौशल और अनुभव भी जरूरी होते हैं।
*प्रतियोगी परीक्षाओं में उपयोग: जो छात्र उच्च शिक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे होते हैं, उनके लिए इस मुहावरे का उपयोग अक्सर किया जाता है।
“किताबी कीड़ा होना” मुहावरे का वाक्य प्रयोग / Kitabi Kida Hona Muhavare Ka Vakya Prayog.
1. मोहन दिन-रात किताबों में डूबा रहता है, सच में वह एक किताबी कीड़ा है।
2. सिर्फ किताबी कीड़ा बनने से कुछ नहीं होगा, खेल-कूद और अन्य गतिविधियों में भी भाग लेना चाहिए।
3. परीक्षा नजदीक आते ही रोहन पूरी तरह किताबी कीड़ा बन गया है।
4. बचपन से ही रीमा पढ़ाई में इतनी मग्न रहती थी कि लोग उसे किताबी कीड़ा कहने लगे।
5. तुम्हें जीवन में आगे बढ़ना है तो सिर्फ किताबी कीड़ा बनकर नहीं, बल्कि व्यवहारिक ज्ञान भी अर्जित करना होगा।
6. राहुल अपने कमरे में बस किताबें पढ़ता रहता है, उसकी इस आदत की वजह से सब उसे किताबी कीड़ा बुलाते हैं।
7. हर समय पढ़ाई में लगे रहने वाले बच्चों को लोग अक्सर किताबी कीड़ा कहकर चिढ़ाते हैं।
8. अगर तुम अच्छी नौकरी चाहते हो, तो कुछ समय के लिए किताबी कीड़ा बनना ही पड़ेगा।
9. कॉलेज में प्रवेश के बाद भी रमेश की आदत नहीं बदली, वह अब भी किताबी कीड़ा बना हुआ है।
10. सिर्फ किताबों से चिपके रहने वाले किताबी कीड़ों को वास्तविक जीवन के संघर्षों का ज्ञान नहीं होता।
11. अरुण का सामाजिक जीवन बिल्कुल खत्म हो गया है क्योंकि वह पूर्ण रूप से किताबी कीड़ा बन चुका है।
12. माँ ने समझाया कि हर समय पढ़ाई करना ठीक नहीं, कभी-कभी खेलना भी जरूरी है, वरना तुम किताबी कीड़ा बन जाओगे।
13. स्कूल में टॉप करने के लिए नेहा कुछ दिनों के लिए किताबी कीड़ा बन गई थी।
14. विद्या ने अपनी मेहनत से दिखा दिया कि किताबी कीड़ा कहलाने वाले भी जीवन में बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं।
15. सिर्फ किताबी कीड़ा बनकर ज्ञान प्राप्त करने से बेहतर है कि उसे व्यवहार में भी लाया जाए।
निष्कर्ष:
'किताबी कीड़ा होना' मुहावरा ज्ञान और अध्ययनशीलता को दर्शाने वाला एक प्रमुख हिंदी मुहावरा है। इसका प्रयोग किसी व्यक्ति की पढ़ाई के प्रति अत्यधिक रुचि को बताने के लिए किया जाता है, लेकिन इसका नकारात्मक पहलू भी है, जिसमें यह व्यक्ति की व्यावहारिक दुनिया से कट जाने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। इसलिए, जीवन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि किताबों के ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किया जा सके।
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